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Lord Ganesh Katha: भगवान गणेश को क्यों नहीं चढ़ाई जाती तुलसी, जानिए इसके पीछे की कथा!

Lord Ganesh Katha
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Lord Ganesh Katha: भगवान गणेश को क्यों नहीं चढ़ाई जाती तुलसी, जानिए इसके पीछे की कथा!

देशभर में इस वक्त गणेश उत्सव (Ganesh Utsav) की धूम है। घरों और सार्वजनिक स्थानों पर विघ्नहर्ता की स्थापना और पूजा की जा रही है। ‘बप्पा’ को प्रसन्न करने के लिए सिन्दूर और दूर्वा जरूर चढ़ाया जाता है, सिन्दूर को मंगल का प्रतीक माना जाता है। गजानन को साबुत सुपारी, साबुत हल्दी और जनेऊ भी चढ़ाया जाता है। मोदक का भोग भी लगाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश (Lord Ganesh)  को कभी भी तुलसी (Tulsi) नहीं चढ़ानी चाहिए। हिंदू धर्म में तुलसी को बहुत पवित्र माना जाता है। यह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है लेकिन भगवान गणेश की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित माना गया है। इस बात का जिक्र एक पौराणिक कथा में मिलता है.

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इस पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान गणेश गंगा नदी के तट पर तपस्या कर रहे थे। इसी दौरान धर्मात्मज की पुत्री तुलसी विवाह की इच्छा से तीर्थयात्रा पर निकलीं। देवी तुलसी सभी तीर्थ स्थानों का भ्रमण करते हुए गंगा तट पर पहुंचीं और उन्होंने युवा गणेशजी को तपस्या में लीन देखा।

शास्त्रों के अनुसार, गणेश जी तपस्या में लीन होकर रत्नों से जड़ित सिंहासन पर विराजमान थे। उनके शरीर के सभी अंगों पर सुगंधित चंदन लगा हुआ था और उनके गले में पारिजात पुष्पों के साथ सोने और रत्नों के कई सुंदर हार सुशोभित थे। गजानन की कमर अत्यंत मुलायम रेशम से बने लाल पीले दुपट्टे में लिपटी हुई थी।

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देवी तुलसी Lord Ganesh के इस रूप पर मोहित हो गईं। उनके मन में विवाह करने की इच्छा जाग उठी। जब तुलसी ने विवाह की इच्छा से गणेशजी का ध्यान भटकाया तो उन्होंने तुलसी द्वारा उनकी तपस्या भंग करना अशुभ समझा। तुलसी की विवाह की मंशा जानने पर गणेशजी ने स्वयं को ब्रह्मचारी बताया और प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।

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विवाह प्रस्ताव अस्वीकार करने पर तुलसी क्रोधित हो गईं और उन्होंने गणेशजी को श्राप दिया कि उनके एक नहीं बल्कि दो विवाह होंगे। इस पर श्रीगणेश ने भी तुलसी को श्राप दिया कि उसका विवाह एक राक्षस से होगा। राक्षस की पत्नी होने के इस श्राप के बारे में सुनकर तुलसी ने गणेश जी से माफी मांगी।

इस पर गणेशजी ने तुलसी से कहा कि तुम्हारा विवाह राक्षस शंखचूर्ण से होगा। फिर भी तुम भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को प्रिय होओगे और कलियुग में संसार को जीवन और मोक्ष दोगे, लेकिन मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना शुभ माना जाएगा। तभी से भगवान गणेश की पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्‍य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. TALKAAJ NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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