पुरानी पेंशन पर क्यों मचा है बवाल? क्या करेगी मोदी सरकार? जानिए OPS और NPS में क्या है अंतर

OPS Vs NPS
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पुरानी पेंशन पर क्यों मचा है बवाल? क्या करेगी मोदी सरकार? जानिए OPS और NPS में क्या है अंतर

OPS Vs NPS: नई पेंशन योजना साल 2004 में लागू की गई थी और इसे लेकर केंद्र सरकार और कई राज्यों के बीच लंबे समय से टकराव चल रहा है. रविवार को पुरानी पेंशन योजना की मांग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में पेंशन शंखनाद रैली में लाखों कर्मचारी जुटे.

राजधानी दिल्ली स्थित रामलीला मैदान (Delhi OPS Rally) एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल, रविवार को पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) की बहाली की मांग को लेकर देश के सभी राज्यों से शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की भारी भीड़ यहां जुटी थी. इस पेंशन शंखनाद महारैली का आयोजन नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) के बैनर तले किया गया था. ऐसे में पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने की बढ़ती मांग के बीच यह जानना जरूरी है कि ये कर्मचारी इसे लागू करने पर क्यों जोर दे रहे हैं और यह New Pension Scheme  यानी NPS से कितनी अलग है। इसके साथ ही अगर सरकार OPS लागू करती है तो सरकारी खजाने पर कितना बोझ बढ़ेगा. आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब…

पुरानी पेंशन स्कीम को इस तरह समझें

नई और पुरानी पेंशन योजना (New And Old Pension) को लेकर केंद्र सरकार और गैर-बीजेपी शासित राज्यों के बीच लंबे समय से टकराव चल रहा है. इस खींचतान के बीच एक बार फिर ओपीएस की मांग को लेकर प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. हालांकि सरकार Old Pension Yojana को बहाल करने के पक्ष में नहीं है. सबसे पहले बात करते हैं कि ये Old Pension Scheme (OPS) क्या है? तो हम आपको बता दें कि पुरानी पेंशन योजना के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारी को अनिवार्य पेंशन का अधिकार मिलता है। यह रिटायरमेंट के समय मिलने वाली बेसिक सैलरी का 50 फीसदी होता है. यानि कि एक कर्मचारी अपनी नौकरी पूरी करने के बाद जिस मूल वेतन पर रिटायर होता है, उसका आधा हिस्सा उसे पेंशन के रूप में दिया जाता है।

पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद नौकरीपेशा कर्मचारी की तरह महंगाई भत्ता और अन्य भत्तों का लाभ मिलता रहता है, यानी अगर सरकार कोई भत्ता बढ़ाती है तो पेंशन भी उसी हिसाब से बढ़ती है.

नई पेंशन योजना से कितना अलग है OPS?

नई पेंशन योजना (New Pension Yojana) वर्ष 2004 में लागू की गई थी और इसके दायरे में वे सरकारी कर्मचारी शामिल हैं जिनकी नियुक्ति 2004 के बाद हुई है। पुरानी और नई पेंशन योजनाओं में जहां काफी अंतर है, वहीं दोनों के कुछ फायदे और नुकसान भी हैं। इनमें सबसे बड़ा अंतर यह है कि ओपीएस के तहत पेंशन राशि का भुगतान सरकारी खजाने से किया जाता है और इस योजना में पेंशन के लिए कर्मचारियों के वेतन से कोई पैसा काटने का प्रावधान नहीं है। वहीं, NPS के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की सैलरी से 10 फीसदी की कटौती की जाती है. नई पेंशन योजना ( New Pension Scheme) में जीपीएफ की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि पुरानी पेंशन योजना में यह सुविधा कर्मचारियों को मिलती है। नई पेंशन योजना शेयर बाजार (Stock Market) पर आधारित है, इसलिए लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना है, हालांकि कम रिटर्न की स्थिति में फंड लॉस होने की भी संभावना है।

सरकारी खजाने पर बोझ की गणना

सरकार की ओर से कहा गया है कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) से सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ता है. इसे लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले सितंबर में एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें आंकड़ों के साथ इस बोझ की जानकारी दी गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक Old Pension Yojana लागू होने से राजकोषीय संसाधनों पर अधिक दबाव पड़ेगा और राज्यों की बचत प्रभावित होगी. आरबीआई की मानें तो उसके अध्ययन से पता चला है कि पुरानी पेंशन योजना को दोबारा अपनाने से अल्पावधि में राज्यों का पेंशन खर्च जरूर कम हो जाएगा, लेकिन भविष्य में अनफंडेड पेंशन देनदारियों में भारी बढ़ोतरी होगी। ओपीएस के कारण पेंशन का बोझ 2030 तक एनपीएस में राज्यों द्वारा किये जाने वाले योगदान से अधिक हो जायेगा.

राज्यों की वित्तीय स्थिति पर असर

भारतीय रिजर्व बैंक की इस अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया कि पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) को अपनाने के बाद नई पेंशन योजना (New Pension Scheme) के तहत पेंशन पर होने वाला खर्च अनुमानित पेंशन खर्च से करीब 4.5 गुना बढ़ जाएगा. इससे 2060 तक सरकारी खजाने पर बोझ बढ़कर जीडीपी का 0.9 फीसदी तक भी पहुंच सकता है. केंद्रीय बैंक के मुताबिक, ओपीएस की बहाली से राज्यों की वित्तीय स्थिति पर भी असर पड़ेगा और वह खराब हो सकती है.

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