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Identify Fake website :आपने फोन पर जो Website खोली है वह सुरक्षित है या नहीं, ऐसे चेक करें 

Identify Fake website :आपने फोन पर जो Website खोली है वह सुरक्षित है या नहीं, ऐसे चेक करें 

Identify Fake website : स्मार्टफोन पर वेब ब्राउज़ करते समय मैलिशियस वेबसाइट (malicious website) का खतरा होता है। हम बता रहे हैं कुछ ऐसे टिप्स जिनसे आप जान सकते हैं कि आपने फोन पर जो वेबसाइट खोली है वह सुरक्षित है या नहीं।

Identify Fake website : स्मार्टफोन कुछ मामलों में कंप्यूटर और लैपटॉप का भी काम करता है। कई लोग अक्सर फोन पर ही कई शॉपिंग वेबसाइट और दूसरी वेबसाइट पर जाते हैं। वहीं दूसरी ओर साइबर क्रिमिनल इन चीजों का खूब फायदा उठाते हैं और मैलिशियस वेबसाइट (malicious website) की मदद से आपके फोन में सेंध लगाकर आपकी बैंक डिटेल्स और आपका पर्सनल डेटा चुरा लेते हैं। इतना ही नहीं कई मामलों में ठग वायरस भी डाल देते हैं।

ऐसे में आपको किसी भी वेबसाइट को मोबाइल पर ब्राउज करने से पहले कई सावधानियां बरतनी चाहिए। यहां हम कुछ ऐसी बातें बता रहे हैं जिनके जरिए आप जान सकते हैं कि आपने फोन पर जो वेबसाइट खोली है वह सुरक्षित है या नहीं।

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इन बातों पर ध्यान दें

अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखें तो ऐसी मैलिशियस वेबसाइट (malicious website) को पहचानना काफी आसान है। नीचे पढ़ें कि कौन से कारक आपको सही या गलत वेबसाइट की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।

1. HTTPS को चेक करें

किसी भी वेबसाइट पर जाते समय सबसे पहले आपको एड्रेस बार चेक करना चाहिए। यदि https:// वेबसाइट के पते से पहले है, तो वेबसाइट सुरक्षित है। दरअसल https इंटरनेट का प्रोटोकॉल है। यह उपयोगकर्ता द्वारा दर्ज की गई किसी भी जानकारी को एन्क्रिप्ट करता है ताकि इसे अन्य सर्वरों पर नहीं भेजा जा सके। अगर वेबसाइट एड्रेस के आगे https:// नहीं लिखा है तो आपका डेटा आसानी से चुराया जा सकता है।

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2. पॉप-अप पर ध्यान दें (Pay attention to pop-ups)

साइबर क्रिमिनल्स भी पॉप-अप के जरिए आपके फोन और कंप्यूटर में सेंध लगाते हैं। ऐसे में जब आप मोबाइल में कोई भी वेबसाइट खोलते हैं तो इस दौरान आने वाले पॉप-अप मैसेज को ध्यान से देखें. कई बार आपको ऐसे पॉप-अप संदेशों के साथ किसी अन्य वेबसाइट पर रीडायरेक्ट किया जाता है और इस तरह की वेबसाइट मैलिशियस (malicious website) हो सकती हैं. कुछ मामलों में, पॉप-अप को ऐसे विज्ञापन पर निर्देशित किया जाता है जिससे बाहर निकलना मुश्किल होता है। अगर किसी वेबसाइट पर लगातार पॉप-अप आ रहे हैं तो आपको ऐसी वेबसाइट से दूर ही रहना चाहिए। वह सुरक्षित नहीं है।

3. परमिशन रिक्वेस्ट को देखें (View Permission Requests)

अगर कोई वेबसाइट आपके फोन के ब्राउजर से कुछ अलग एक्सेस करना चाहती है तो उसे अनुमति की जरूरत होती है। यहां तक ​​कि सही वेबसाइट भी ऐसी अनुमति मांगती हैं। ऐसे में पहली बार अनुमति लेना चिंता का विषय नहीं है। लेकिन अगर कोई वेबसाइट कुछ डाउनलोड करने के लिए कहती है या कोई अन्य व्यक्तिगत जानकारी मांगती है, तो यहां आपको ध्यान देने की जरूरत है। ऐसी वेबसाइटें सुरक्षित नहीं होती हैं। इसलिए आपको हर परमिशन को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

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4. URL को ध्यान से देखें (Check the URL carefully)

अगर आप किसी शॉपिंग वेबसाइट, बैंकिंग वेबसाइट या अन्य सूचनात्मक वेबसाइट पर जा रहे हैं, तो एड्रेस बार में उसका URL ध्यान से देखें। फिशिंग के लिए हैकर्स किसी नामी कंपनी की तरह वेबसाइट बनाते हैं। इस प्रकार की वेबसाइट में केवल एक या दो स्पेलिंग का ही अंतर होता है। ऐसे में आपके लिए जरूरी है कि आप URL को सही से देखें। अगर स्पेलिंग में कोई अंतर है तो वेबसाइट फर्जी है।

5. डायरेक्ट एड्रेस बार में वेबसाइट सर्च करने की जगह सर्च इंजन से देखें

अगर आप कोई वेबसाइट खोलना चाहते हैं तो ब्राउजर में ऊपर के एड्रेस बार में उस वेबसाइट का एड्रेस डालने की बजाय सर्च इंजन में टाइप करें। ऐसा करने से आपके गलत वेबसाइट पर जाने का खतरा कम हो जाता है। दरअसल सर्च इंजन ज्यादातर वेबसाइट को चेक करते रहते हैं। अगर आपने किसी वेबसाइट को सर्च इंजन पर सर्च किया, लेकिन उसके बारे में कुछ लिखा नहीं आ रहा है तो इसका मतलब है कि उक्त वेबसाइट मैलिशियस है.

6. वेबसाइट पर दिए कन्टेंट को भी देखें (See also the content given on the website)

अगर आप ज्यादातर फेक वेबसाइट्स को गौर से देखेंगे तो आपको कंटेंट में कई कमियों के साथ-साथ उनमें खराब क्वालिटी भी नजर आएगी। मसलन कंटेंट की स्पैलिंग में कई गलतियां हो सकती हैं. क्योंकि इन्हें प्रफेशनल टीम नहीं चलाती है, इसलिए ऐसी गलती की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा तस्वीर से निकली अन्य बातें भी काफी हद तक असली और नकली वेबसाइट की हिंट देती हैं।

7. Virus Total का इस्तेमाल करें (Use Virus Total)

Virus Total एक बहुत ही प्रसिद्ध वेबसाइट है। यह आपको किसी भी URL को स्कैन करने देता है। इस दौरान अगर कोई वेबसाइट संदिग्ध या दुर्भावनापूर्ण होती है तो आपको उसकी जानकारी दी जाती है।

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